सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ दी गई चार्जशीट निरस्त
इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि चीफ जनरल मैनेजर (CGM) को सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जैसे वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध चार्जशीट जारी करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने इस आधार पर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ जारी चार्जशीट को अवैध ठहराते हुए निरस्त (Quash) कर दिया। हालांकि अदालत ने सक्षम प्राधिकारी (मैनेजिंग डायरेक्टर) को कानून के अनुसार नई चार्जशीट जारी करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने याचिका दायर कर चीफ जनरल मैनेजर द्वारा 16 जुलाई 2021 जारी चार्जशीट को चुनौती दी थी। उसका कहना था कि उसके खिलाफ जारी चार्जशीट अधिकार क्षेत्र के अभाव में जारी की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के डेलीगेशन ऑफ पावर 2017–18 के अनुसार, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पर मेजर पेनाल्टी लगाने और उससे संबंधित चार्जशीट जारी करने का अधिकार मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को है, न कि चीफ जनरल मैनेजर को।
पक्षकारों की दलीलें
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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धीरज सिंह पंवार की दलील थी कि CGM केवल सीमित श्रेणी के अधिकारियों पर माइनर पेनाल्टी लगा सकता है और मेजर पेनाल्टी के मामलों में चार्जशीट जारी करने का अधिकार उसके पास नहीं है।
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राज्य/विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि चूंकि CGM को माइनर पेनाल्टी लगाने का अधिकार है, इसलिए वह चार्जशीट भी जारी कर सकता है।
हाईकोर्ट का निष्कर्ष
कोर्ट ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 और डेलीगेशन ऑफ पावर 2017–18 का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा:
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जिस अधिकारी को मेजर पेनाल्टी लगाने का अधिकार नहीं है, वह मेजर पेनाल्टी से संबंधित चार्जशीट जारी नहीं कर सकता।
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जो शक्ति सीधे तौर पर प्रदान नहीं की गई है, उसे व्याख्या के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नहीं दिया जा सकता।
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चार्जशीट जारी करने से पहले आवेदनशील मनन (Application of Mind) आवश्यक है, जो केवल निर्धारित अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है।
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CGM, नियमों के तहत, यदि मेजर पेनाल्टी का मामला बनता है तो वह उसे मैनेजिंग डायरेक्टर के समक्ष भेज सकता है।
अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 16/07/2021 की चार्जशीट को निरस्त कर दिया। साथ ही, सक्षम प्राधिकारी (मैनेजिंग डायरेक्टर) को कानून के अनुसार नई चार्जशीट जारी करने की स्वतंत्रता प्रदान की।
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